पूर्णिमा 12 नवंबर चुपचाप तुलसी के निचे गाड़ दे इस 1 चीज़ को आपकी 7 पुस्ते भी पैसो में करेंगी राज

इसी दिन भगवान विष्णु ने मतस्यावतार लिया था। इस साल ये दिन 12 नवंबर को पड़ रहा है। मान्यता है कि इस पवित्र दिन पर गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है।

वैसे तो साल में कई पूर्णिमा पड़ती हैं। लेकिन कार्तिक पूर्णिमा को सभी में श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। जिसने पूरे देवलोक में हाहाकार मचा रखा था।

हर साल इस पूर्णिमा के दिन देव दिवाली भी मनाई जाती है। एक मान्यता ये भी है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मतस्यावतार लिया था। इस साल ये दिन 12 नवंबर को पड़ रहा है। मान्यता है कि इस पवित्र दिन पर गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त (Kartik Purnima Date And Time) :

कार्तिक पूर्णिमा की तिथि: 12 नवंबर 2019
पूर्णिमा तिथि आरंभ: 11 नवंबर 2019 को शाम 06 बजकर 02 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्तत: 12 नवंबर 2019 को शाम 07 बजकर 04 मिनट तक

कार्तिक पूर्णिमा का कथा (Kartik Purnima Katha):

पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था। उसके तीन पुत्र थे – तारकक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिक ने तारकासुर का वध किया। अपने पिता की हत्या की खबर सुन तीनों पुत्र बहुत दुखी हुए।

तीनों ने मिलकर ब्रह्माजी से वरदान मांगने के लिए घोर तपस्या की। ब्रह्मजी तीनों की तपस्या से प्रसन्न हुए और बोले कि मांगों क्या वरदान मांगना चाहते हो। तीनों ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने को कहा।

तीनों ने मिलकर फिर सोचा और इस बार ब्रह्माजी से तीन अलग नगरों का निर्माण करवाने के लिए कहा, जिसमें सभी बैठकर सारी पृथ्वी और आकाश में घूमा जा सके। एक हज़ार साल बाद जब हम मिलें और हम तीनों के नगर मिलकर एक हो जाएं, और जो देवता तीनों नगरों को एक ही बाण से नष्ट करने की क्षमता रखता हो, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया।

तीनों वरदान पाकर बहुत खुश हुए। ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया। तारकक्ष के लिए सोने का, कमला के लिए चांदी का और विद्युन्माली के लिए लोहे का नगर बनाया गया।

तीनों ने मिलकर तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया। इंद्र देवता इन तीनों राक्षसों से भयभीत हुए और भगवान शंकर की शरण में गए। इंद्र की बात सुन भगवान शिव ने इन दानवों का नाश करने के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया।

इस दिव्य रथ की हर एक चीज़ देवताओं से बनीं। चंद्रमा और सूर्य से पहिए बने। इंद्र, वरुण, यम और कुबेर रथ के चाल घोड़े बनें। हिमालय धनुष बने और शेषनाग प्रत्यंचा बनें। भगवान शिव खुद बाण बनें और बाण की नोक बने अग्निदेव। इस दिव्य रथ पर सवार हुए खुद भगवान शिव।

भगवानों से बनें इस रथ और तीनों भाइयों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जैसे ही ये तीनों रथ एक सीध में आए, भगवान शिव ने बाण छोड़ तीनों का नाश कर दिया। इसी वध के बाद भगवान शिव को त्रिपुरारी कहा जाने लगा। यह वध कार्तिक मास की पूर्णिमा को हुआ, इसीलिए इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाने लगा।

मेष राशि

सूर्य आपकी राशि के चौथे भाव में प्रवेश होगा। सूर्य के कर्क राशि में जाने से जीवनसाथी को भी कार्यक्षेत्र में लाभ मिलने की संभावना है। किंतु सूर्य का अधिक प्रभाव होने के कारण आपको कार्यक्षेत्र पर मानसिक तनाव हो सकता है।

वृषभ राशि

सूर्य का आपकी राशि के तीसरे भाव में प्रवेश होगा। सूर्य का आना आपको नयी ऊर्जा देगा सूर्य के प्रभाव से आपके कार्यक्षेत्र में बदलाव आ सकता है, शायद आप नई नौकरी खोजने में सफल हो जाएं।

मिथुन राशि

सूर्य का आपकी राशि के दूसरे भाव में प्रवेश करेगा, जिसके चलते आपके स्वभाव में बड़ा बदलाव आएगा। आपको ज्यादा गुस्सा आ सकता है इसलिए हमेशा सतर्क रहें क्योंकि सूर्य अग्नि तत्व का ग्रह है।

कर्क राशि

सूर्य इसी राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिसके कारण आपके स्वभाव में अहंकार और चिडचिडापन देखा जा सकता है लेकिन आपको सिर्फ स्वयं पर नियंत्रण करना ही बेहतर होगा।

सिंह राशि

सिंह राशि से मंगल का परिवर्तन 12वें घर में हो रहा है। जो कि आपका व्यय व निवेश का घर है। कार्य के चलते विदेश जा सकते हैं। यदि रविवार को सूर्य को प्रसन्न करने के उपाय करेंगे तो कुछ राहत मिल सकती है।

कन्या राशि

सूर्य का आपकी राशि के 11वें भाव में प्रवेश होगा। बिजनेस करने वालों को आर्थिक लाभ और साथ ही सभी की कार्यक्षमता में वृद्धि करेगा।

तुला राशि

ऑफिस में तरक्की होने के शुभ संकेत हैं। आप किसी उच्च पद पर आसीन हो सकते हैं। कर्म क्षेत्र में समय बहुत ही अच्छा होता है। यहाँ सूर्य के आने से आपको लगेगा कि आप दूसरों से अच्छा काम कर रहे हैं। थोड़ा सा अभिमान जाग जाएगा इसमें कोई बुराई नहीं है।

वृश्चिक राशि

सूर्य का आपकी राशि के नवम भाव में प्रवेश होगा, जिसके चलते आपका समय मिलाजुला हो सकता है। इस राशि के जातको को सूर्य का अधिक प्रभाव होने के कारण आपकी किस्मत आपका साथ देगी।

धनु राशि

सूर्य का आपकी राशि के आठवें भाव में प्रवेश कर रहा है। अचानक मानहानि होने की सम्भावना तो है ही, स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव हो सकता है। गाड़ी चलाते समय सावधानी बरतें साथ ही कोई बड़ा निवेश ना करें।

मकर राशि

मंगल के साथ सूर्य अपने सातवें भाव में प्रवेश कर रहा है जिससे इस दौरान आपके परिवार के साथ मनमुटाव हो सकता है इसलिए विवाद से बचने के लिए ज्यादा से कोशिश करें।

कुम्भ राशि

आपके लिए तो सूर्य सातवें भाव है, इसलिए बहुत बार शादीशुदा जीवन सुखी नहीं होता। वैसे यह अच्छा भाव है सूर्य के फल एक तरफ तो उतने अच्छे नहीं रहेंगे लेकिन दूसरी तरफ आपको काम-काज में बरकत भी होगी।

मीन राशि

सूर्य का आपकी राशि के 5वें भाव में प्रवेश होगा। सूर्य आपकी राशि में आकर कार्यक्षेत्र पर परेशानियां लाएगा। इस समय यदि किसी महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा में भाग ले रहे हैं तो परीक्षा तो थोड़ा सावधानी पूर्वक करें, हड़बड़ी न करें और संयम के साथ ध्यान से सवालों के जवाब दें।