24 सितम्बर से श्राद्ध माह सिर्फ एक चम्मच दही जिंदगी भर रहोगे पितृ दोष मुक्त

भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर अश्विन माह की अमावस्या तक के 16 दिन पितृपक्ष के नाम से जाने जाते हैं। इन 16 दिनों में लोग अपने मृत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखकर धार्मिक कर्म करते हैं

पितृ के निमित पितृ पक्ष में धार्मिक कर्म उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्धकर्म करके सम्पन्न किए जाते हैं। जो लोग पितृ के निमित श्रद्धा न रखकर श्राद्धकर्म नहीं करते, पितृगण उनसे नाराज होकर उन्हें श्रापित भी करते हैं, आम भाषा में इस श्राप को पितृदोष कहा जाता है।

पितृपक्ष में श्राद्धकर्ता को पान खाना, तेल लगाना, क्षौरकर्म, मैथुन व पराया अन्न खाना, यात्रा करना, क्रोध करना वर्जित है।
श्राद्धकर्म में हाथ में जल, अक्षत, चन्दन, फूल व तिल लेकर ब्राह्मणों से संकल्प लेना आवश्यक है।


श्राद्धकर्म में चना, मसूर, उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा, कचनार, खीरा, काला उड़द, काला नमक, बासी, अपवित्र फल या अन्न निषेध माने गए हैं।

श्राद्धकर्म में पितृ की पसंद का भोजन जैसे दूध, दही, घी व शहद के साथ अन्न से बनाए गए पकवान जैसे खीर बनाने चाहिए।


श्राद्धकर्म में तर्पण आवश्यक है इसमें दूध, तिल, कुशा, पुष्प, गंध मिश्रित जल से पितृों को तृप्त किया जाता है।
श्राद्धकर्म में ब्राह्मण भोज के समय परोसने के बर्तन दोनों हाथों से पकड़ कर लाने चाहिए।

श्राद्धकर्म में गंगाजल, दूध, शहद, दौहित्र, कुश, तिल और तुलसी पत्र का होना महत्वपूर्ण है।
श्राद्धकर्म में जौ, कांगनी, मटर और सरसों का उपयोग श्रेष्ठ रहता है।


श्राद्धकर्म में गाय का दूध, घी व दही ही प्रयोग में लेना चाहिए। भैंस बकरी इत्यादि का दूध वर्जित माना गया है।

श्राद्धकर्म में लोहे का उपयोग किसी भी रूप में अशुभ माना जाता है।


ब्राह्मण को मौन रहकर व व्यंजनों की प्रशंसा किए बगैर भोजन करना चाहिए।
श्राद्धकर्म तिल का होना आवश्यक है, तिल पिशाचों से श्राद्ध की रक्षा करते हैं।

श्राद्धकर्म में कुशा का होना आवश्यक है, कुशा श्राद्ध को राक्षसों से बचाती है।
श्राद्धकर्म में जल में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके तर्पण करना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष सबसे बड़ा दोष माना जाता है। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति जीवन में काफी उतार-चढ़ाव महसूस करता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन की कमी से लेकर मानसिक तनाव तक झेलने पड़ते हैं। पितृदोष व्यक्ति के जीवन में हमेशा तरक्की में बाधा बना रहता है।

हम आपको बताने जा रहा है कम खर्च में आसान 11 उपाय, जो आपके जीवन की तकदीर और तस्वीर बदल देंगे। इससे पितृ दोष दूर होगा, वहीं पितृ प्रसन्न भी रहेंगे।

1. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उसके घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने पूर्वजों का फोटो लगाकर उस पर हार-माला चढ़ाकर रोज उनका स्मरण करना चाहिए। इससे अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलेगा, वहीं दोष भी दूर होने लगेगा।

2. अपने पूर्वजों के निधन की तिथि पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को श्रद्धा पूर्वक भोजन कराएं। उस भोजन में पूर्वजों के पसंद की वस्तु जरूर रखें।

3. संभव हो सके तो अपने सामर्थ्य के मुताबिक गरीबों को कपड़े और अन्न का दान करें। इससे भी दोष दूर होता है और तरक्की के रास्ते खुलने लगते हैं।

4. घर के आसपास पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल चढ़ाएं, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय जनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगना चाहिए।

5. शाम के वक्त दीप जलाएं और नाग स्तोत्रं, महामृत्युंजय मंत्र अथवा रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र और नवग्रह स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे पितृ दोष शांति होता है।

6. सोमवार की सुबह स्नान करके शिव मंदिर में आक के 21 फूल, दही, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। 21 सोमवार करने से पितृदोष का प्रभाव कम हो जाता है और मन में खुशियां महसूस होने लगती हैं।

7. रोज अपने इष्ट देव व कुल देव की पूजा करने से भी पितृ दोष दूर हो जाता है।

8. कुंडली में पितृदोष होने पर किसी भी गरीब कन्या का विवाह या उसकी बीमारी में मदद करने से भी पितृ दोष दूर हो जाता है।

9. ब्राह्मणों के लिए गोदान करें, गर्मी में पानी पिलाने के लिए कुएं खुदवाएं अथवा राहगीरों को ठंडा पानी पिलाने से भी इस दोष से छुटकारा मिल जाता है।

10. पीपल और बरगद का पेड़ लगाएं। विष्णु भगवान के मंत्र जप, श्रीमद्‍भागवत गीता का पाठ करने से भी पितृ शांत रहते हैं और दोष धीरे-धीरे कम होने लगता है।

11. पितरों के नाम पर गरीब बच्चों की मदद करने और स्वर्गीय जनों के नाम से अस्पताल, मंदिर, स्कूल धर्मशाला बनाने से भी बेहद लाभ मिलता है।

इस मंत्र से दूर होता है दोष

1. ऊं सर्व पितृ देवताभ्यो नमः ।

2. ऊं प्रथम पितृ नारायणाय नमः ।।

क्यों होता है पितृ दोष

जब परिवार के किसी पूर्वज की मौत के बाद उसका ठीक प्रकार से अंतिम संस्कार न होता है या कोई कमी रह जाती है या अपने पूर्वजों के जीवित अवस्था में कोई इच्छा अधूरी रह जाती है तो उनकी आत्मा घर और आने वाली पीढ़ी के लोगों के बीच ही भटकती है।

मृत पूर्वजों की अतृप्त आत्मा ही परिवार के लोगों को परेशान करती है और वह अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए दबाव डालती है। इसलिए कहा जाता है कि पूर्वजों के कारण वंशजों को होने वाला कष्ट ही पितृदोष है।

मेष राशि वालों के लिए इस पितृ पक्ष के प्रभाव से आने वाला समय अनुकूल रहेगा। कार्य क्षेत्र में विस्तार संभव है। अटके धन की प्राप्ति होगी। व्यवसाय में लाभ बढ़ेगा।

सिंह राशि

पितृ पक्ष से सिंह राशि के जातकों को आर्थिक लाभ की संभावना है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. रुके हुए कामों में सफलता मिलेगी। साथ ही प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी।

तुला राशि

तुला राशि वालों को इस पितृ पक्ष से विशेष लाभ मिलने के योग बन रहे है |कार्य क्षेत्र में विस्तार संभव है। अटके धन की प्राप्ति होगी। व्यवसाय में लाभ बढ़ेगा। घर में खुशी होगी। विदेशी की यात्रा कर सकते हैं।

मीन राशि

इस पितृ पक्ष के प्रभाव से मीन राशि वालों की इच्छाशक्ति में वृद्धि होगी। छोटी यात्रा का योग बनेगा, यात्रा मंगलमय रहेगी। पारिवारिक संबंधों में सुधार बनेगा।प्रेम संबंधों में सफलता मिलेगी और नौकरी पेशे वाले व्यक्तियों को प्रमोशन मिल सकता है।

कुंभ राशि

कुम्भ राशि वालों के उत्साह में वृद्धि होगी। नौकरी में उन्नति के अवसर मिलेंगे।व्यवसाय में लाभ होगा। भू संपत्ति से लाभ के अवसर मिलेंगे। व्यावसायिक लाभ बढ़ेगा।शारीरिक व मानसिक रूप से प्रसन्नता का अनुभव करेंगे।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों पर इस पितृ पक्ष से इनके करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे। व्यवसाय में धन लाभ बढ़ेगा। मित्र से भेंट होगी जिसकी वजह से किसी नए प्रोजेक्ट पर आगे बढऩे की संभावना रहेगी।मन प्रसन्न होगा

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