5 साल बाद 17 अक्टूबर को करवा चौथ बन रहा है काल सर्प योग 4 राशियों की चमकेगी किस्मत होगी धन प्राप्ति

वैसे तो एक व्रत है, लेकिन अब इसने एक उत्‍सव का रूप ले लिया है. यही वजह है कि पहले कुछ जगह तक सीमित रहने वाला यह व्रत अब देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है.

यूं तो हिन्‍दू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए ढेर सारे व्रत है लेकिन करवा चौथ (Karva Chauth Fast) का विशेष स्‍थान है. इस दिन महिलाएं दिन भर भूखी-प्‍यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं.

इस दिन पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा (Karva Chauth Katha) सुनी जाती है. फिर रात के समय चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के बाद ही यह व्रत संपन्‍न होता है.

मान्‍यता है कि करवा चौथ का व्रत रखने से अखंड सौभाग्‍य का वरदान मिलता है. हर साल की तरह इस बार भी करवा चौथ की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस बार करवा चौथ पर पूरे 70 साल बाद मंगल योग बन रहा है.

ज्‍योतिषियों का कहना है कि साल 2019 के करवा चौथ में रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग है, जिसे बेहद फलदाई माना जाता है.
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करवा चौथ कब है?
करवा चौथ (Karva Chauth) का त्‍योहार दीपावली से नौ दिन पहले मनाया जाता है. हिन्‍दू पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी को आता है. वहीं, अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह त्‍योहार अक्‍टूबर के महीने में आता है. इस बार करवा चौथ 17 अक्‍टूबर 2019 को है.

करवा चौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त (Karva Chauth Date and Time)
करवा चौथ की तिथि: 17 अक्‍टूबर 2019
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 17 अक्‍टूबर 2019 (गुरुवार) को सुबह 06 बजकर 48 मिनट से
चतुर्थी तिथ‍ि समाप्‍त: 18 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक

करवा चौथ व्रत का समय: 17 अक्‍टूबर 2019 को सुबह 06 बजकर 27 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक.
कुल अवधि: 13 घंटे 50 मिनट
पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक.
कुल अवधि: 1 घंटे 16 मिनट.

करवा चौथ की पूजन सामग्री
करवा चौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख दें. पूजन सामग्री इस प्रकार है- मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्‍कन, पानी का लोटा, गंगाजल, दीपक, रूई, अगरबत्ती, चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत, फूल, कच्‍चा दूध,

दही, देसी घी, शहद, चीनी, हल्‍दी, चावल, मिठाई, चीनी का बूरा, मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा के पैसे.

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करवा चौथ की पूजा विधि?
– करवा चौथ वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान कर लें.
– अब इस मंत्र का उच्‍चारण करते हुए व्रत का संकल्‍प लें- ”मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये”.
– सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें और फिर दिन भर निर्जला व्रत रखें.

– दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और भीगे हुए चावलों को पीसकर घोल तैयार कर लें. इस घोल से फलक पर करवा का चित्र बनाएं. वैसे बाजार में आजकर रेडीमेड फोटो भी मिल जाती हैं. इन्‍हें वर कहा जाता है. चित्रित करने की कला को करवा धरना का जाता है.
– आठ पूरियों की अठावरी बनाएं. मीठे में हल्‍वा या खीर बनाएं और पकवान भी तैयार करें.

– अब पीली मिट्टी और गोबर की मदद से माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं. अब इस प्रतिमा को लकड़ी के आसान पर बिठाकर मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी और बिछुआ अर्पित करें.
– जल से भर हुआ लोट रखें.
– करवा में गेहूं और ढक्‍कन में शक्‍कर का बूरा भर दें.
– रोली से करवा पर स्‍वास्तिक बनाएं.
– अब गौरी-गणेश और चित्रित करवा की पूजा करें.

– पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का उच्‍चारण करें- ”ऊॅ नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥”
– करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें.
– कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपने सभी बड़ों का आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें.
– पानी का लोटा और 13 दाने गेहूं के अलग रख लें.

– चंद्रमा के निकलने के बाद छलनी की ओट से पति को देखें और चन्द्रमा को अर्घ्‍य दें.
– चंद्रमा को अर्घ्‍य देते वक्‍त पति की लंबी उम्र और जिंदगी भर आपका साथ बना रहे इसकी कामना करें.
– अब पति को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लें और उनके हाथ से जल पीएं. अब पति के साथ बैठकर भोजन करें.

करवा चौथ की कथा (Karva Chauth Katha)
पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी. सेठानी समेत उसकी बहुओं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था. रात्रि को साहूकार के लड़के भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन से भोजन के लिए कहा.

इस पर बहन ने जवाब दिया- “भाई! अभी चांद नहीं निकला है, उसके निकलने पर अर्घ्‍य देकर भोजन करूंगी.” बहन की बात सुनकर भाइयों ने क्या काम किया कि नगर से बाहर जा कर अग्नि जला दी और छलनी ले जाकर उसमें से प्रकाश दिखाते हुए उन्‍होंने बहन से कहा- “बहन! चांद निकल आया है. अर्घ्‍य देकर भोजन कर लो.”

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यह सुनकर उसने अपने भाभियों से कहा, “आओ तुम भी चन्द्रमा को अर्घ्‍य दे लो.” परन्तु वे इस कांड को जानती थीं, उन्होंने कहा- “बाई जी! अभी चांद नहीं निकला है, तेरे भाई तेरे से धोखा करते हुए अग्नि का प्रकाश छलनी से दिखा रहे हैं.”

भाभियों की बात सुनकर भी उसने कुछ ध्यान न दिया और भाइयों द्वारा दिखाए गए प्रकाश को ही अर्घ्‍य देकर भोजन कर लिया. इस प्रकार व्रत भंग करने से गणेश जी उस पर अप्रस्सन हो गए. इसके बाद उसका पति सख्त बीमार हो गया और जो कुछ घर में था उसकी बीमारी में लग गया.

जब उसने अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसने पश्चाताप किया गणेश जी की प्राथना करते हुए विधि विधान से पुनः चतुर्थी का व्रत करना आरम्भ कर दिया. श्रद्धानुसार सबका आदर करते हुए सबसे आशीर्वाद ग्रहण करने में ही मन को लगा दिया.

इस प्रकार उसकी श्रद्धा भक्ति सहित कर्म को देखकर भगवान गणेश उस पर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवन दान दे कर उसे आरोग्य करने के पश्चात धन-संपत्ति से युक्त कर दिया. इस प्रकार जो कोई छल-कपट को त्याग कर श्रद्धा-भक्ति से चतुर्थी का व्रत करेंगे उन्‍हें सभी प्रकार का सुख मिलेगा.

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देशभर में त्‍यौहारों का सीजन है. नवरात्र और दशहरा खत्‍म हो जा चुका है. अब करवा चौथ और दिवाली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. बाजारों में चुड़ी और मेहंदी वालों की चांदी हो चुकी है.

दरअसल करवा चौथ के लिए बाजारों भीड़ से भरे पड़े हैं. कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है. यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद अहम माना जाता है.

इस दिन विवाहित महिलाएं और जिन महिलाओं की शादी होने वाली है वह अपने पति की लम्बी आयु और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए निर्जला यानी बिना अन्न और जल का व्रत रखती हैं. आपको बात दें कि इस व्रत को कई स्‍थानों पर करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है.

नवरात्रि का शुभ समय – इस बार करवाचौथ 17 अक्टूबर को है. इस दिन के महिलाएं अपने पति के लिए व्रत करेंगी. देश में कहीं कहीं शादी से पहले भी व्रत करने की प्रथा होती है.

कहा जाता है कुंवारी लड़की अच्छे लड़के मिलने के लिए व्रत करती हैं. इस बार महिलाओं के पास पूजा करने के लिए 17 अक्टूबर को 1 घंटे और 14 मिनट का समय है.
करवा चौथ मूर्हूत –


करवा चौथ पूजा का समय शाम 5:54 pm पर शुरू होगा.
शाम 7:09 pm पर करवा चौथ पूजा करने का समय खत्म होगा.

करवा चौथ 2019 चंद्रोदय का समय

– करवाचौथ पर महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं.

– इस दिन महिलाएं बिना चंद्रमा के पूजा संपन्न कर अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं.

– कहा जाता है कि चाँद देखे बिना व्रत अधूरा रहता है. जबतक चांद की पूजा के कोई महिला न कुछ भी खा सकती हैं और न पानी पी सकती हैं.

– चंद्रमा की पूजा के दौरान महिलाओं को एक घेरा बनाकर बैठती हैं और फिर एक महिला 7 बार फेरी लगाकर एक-दूसरे से थाली बदलती हैं.

– इस फेरी के दौरान गीत गाएं जाते हैं. महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना करती जाती हैं और थाली को 7 बार फेरती जाती हैं.

– इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 08:11 pm होगा.

करवा चौथ के दिन शाम को स्त्रियां चन्द्रमा को जल अर्पण करती हैं और फिर चांद और पति को छलनी से देखती हैं. इसके बाद वे अपने पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत पूरा करती हैं.

करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करने का विधान है. चंद्रमा आने के बाद महिलाएं उसके दर्शन करती है, चंद्रमा को जल चढ़ाकर भोजन ग्रहण करती हैं.

करवा चौथ 2018: क्‍यों जरूरी है चांद देखना

करवा चौथ के दिन चंद्रमा का उदय शाम आठ बजकर चौदह मिनट पर होगा. इस दिन महिलाएं चंद्रमा को देखे बिना न तो कुछ खाती हैं और न ही पानी ग्रहण करती हैं.

चंद्रमा का उदय होने के बाद सबसे पहले महिलाएं छलनी में से चंद्रमा को देखती हैं फिर अपने पति को. इसके बाद पति अपनी पत्नियों को लोटे में से जल पिलाकर उनका व्रत पूरा करवाते हैं. कहते हैं कि चांद देखे बिना यह व्रत अधूरा रहता है.

करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को विशेष तौर पर लाल कपड़े ही पहनने चाहिए क्योंकि लाल रंग हिन्दू धर्म में शुभ रंग होने का प्रतीक माना जाता है। गलती से भी करवा चौथ के दिन नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

ऐसा कपड़े पहनने से इस दिन पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। उपवास वाले दिन महिलाओं को किसी अन्य व्यक्ति को दूध,दही,चावल और सफेद कपड़ा नहीं देने चाहिए। करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को अपने से बड़ी उम्र की किसी भी बुजुर्ग महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है।

इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 17 अक्टूबर को है। इस दिन रविवार का दिन है। ये व्रत कार्तिक माह की व्यापिनी चतुर्थी को महिलाओं द्वारा रखा जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा में पुरुष रुपी ब्रह्मा की उपासना की जाती है और इससे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 58 मिनट को होगा और चतुर्थी तिथि की समाप्ति 28 अक्टूबर दोपहर 2 बजकर 16 मिनट को होगी।

इस करवा चौथ इन 5 राशियों को करोड़पति बनने से कोई नहीं रोक पाएगा.

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