नवरात्रि 10 अक्टूबर 2018 को पहला नवरात्रा 4 राशियों के खुलेंगे बंद किस्मत के ताले !!

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नौ रातों का समूह यानी नवरात्रे की शुरूआत अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पहली यानी तारीख 10 अक्टूबर से होने जा रही है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। अश्विन पक्ष में आने वाले नवरात्रे शारदीय नवरात्रे भी कहलाते हैं। नवरात्रों की शुरूआत सनातन काल से हुई थी। सबसे पहले भगवान रामचंद्र ने समुंद्र के किनारे नौ दिन तक दुर्गा मां का पूजन किया था और इसके बाद लंका की तरफ प्रस्थान किया था। फिर उन्होंने युद्ध में विजय भी प्राप्त की थी, इसलिए दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है और माना जाता है कि अधर्म की धर्म पर जीत, असत्‍य की सत्‍य पर जीत के लिए दसवें दिन दशहरा मनाते हैं।

नवरात्रि का शुभ समय – मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद लेने की अगर कामना करते हैं तो आपको कुछ बातें विशेष तौर पर अपनानी होंगी। जिसमें सबसे पहले हैं शुभ मुहूर्त में पूजा करना। नवरात्र में लोग अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं। ये कलश शुभ मुहूर्त में स्थापित करने से आपके जीवन में आने वाली परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इस बार नवरात्रि का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसके बाद नौ दिन तक रोजाना मां दुर्गा का पूजन और उपवास किया जाता है। अभिजीत मुर्हूत 11.36 से 12.24 बजे तक है। देवी बोधन 15 अक्टूबर को होगा। बांग्ला पूजा पद्धति को मानने वाले पंडालों में उसी दिन पट खुल जाएंगे। जबकि 27 सितंबर सप्तमी तिथि को सुबह 9.40 बजे से देर शाम तक माता रानी के पट खुलने का शुभ मुहूर्त है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना से आपकी पूजा सफल होती है।

सुबह उठकर सप्तशती का पाठ करना शुभ रहता है।

कब-कब होगी किस देवी की पूजा
– प्रथम नवरात्रि 10 अक्टूबर को प्रथम दिन शैलपुत्री की पूजा होगी।

– 11 अक्टूबर को नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी।

– 12 अक्टूबर को नवरात्रि का तीसरा दिन है। और इस दिन माता चन्द्रघंटा की पूजा होगी।

– नवरात्रि का चौथा दिन 13 अक्टूबर को है और इस दिन माता कुष्मांडाँ की पूजा होगी।

– 14 अक्टूबर को नवरात्रि का पांचवा दिन है और इस दिन माता स्कंदमाता की पूजा होगी।

– 15 अक्टूबर को नवरात्रि का छठा दिन है और इस दिन माता कात्यायनी की पूजा होगी।

– सपत्मी मतलब नवरात्रि का सातवा दिन 16 अक्टूबर को है। इस सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा होगी।

– अष्ठमी अर्थात नवरात्रि का अठवा दिन 17 अक्टूबर को है। इस आठवें दिन माता महागौरी की पूजा होगी।

– नवमी अर्थात नवरात्रि का नौवा दिन 18 अक्टूबर को को है। इस नौवें दिन माता सिद्धिदात्रि की पूजा होगी।

पहले नवरात्रे वाले दिन मां के रूप शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। इसी दिन कलश स्थापना होती है। कलश पर स्वास्तिक बनाया जाता है। हिंदू घर्म में इसकी बहुत मान्यता है, इसके बाद कलश पर मौली बांध कर उसमें जल भरकर उसे नौ दिन के लिए स्थापित कर दिया जाता है।

कुछ लोग नवरात्रों के अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं और कुछ लोग नवमी के दिन पूजन किया जाता है। कन्या पूजन के बिना नवरात्रों का फल नहीं मिलता है। आप चाहे उपवास ना करें लेकिन नवरात्र के दौरान कन्या पूजन सबसे महत्वपूर्ण है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है।

हिन्दू धर्म में हरएक त्यौहार का अपना ही एक विशेष महत्व होता है .

ठीक इसी प्रकार यह त्यौहार भी हिन्दुओ के लिए विशेष महत्व रखता है .
ये तो सभी जानते हैं कि नवरात्र के सभी नौ दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा होती है। 10 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। 11 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन है। 12 अक्टूबर को मां चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना की जाएगी।

13 अक्टूबर का दिन मां कूष्मांडा की पूजा के नाम रहेगा। 14 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। 15 अक्टूबर को मां कात्यायनी की पूजा होगी और 16 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा संपन्न की जाएगी। 17 अक्टूबर को अष्टमी मनाई जाएगी और इस दिन मां महागौरी की पूजा होगी। 18 को महानवमी होगी और इस दिन मां सिद्धदात्री की पूजा और कन्या पूजन होगा।

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