खरीद लो पैसे रखने के लिए अब तिजोरी क्योकि देवशयनी एकादशी से पहले ये 3 राशि होंगी करोड़पति

सनातन धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है, इस दिन पुण्य कार्य और ईश्वर की भक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी को मनाई जाती है।

इस बार यह एकादशी 12 मई दिन शुक्रवार को है। पुराणों में इस एकादशी को सौभाग्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया गया है। साथ ही इस एकादशी से लेकर अगले चार महीने के लिए भगवान देवप्रबोधनी तक निद्रा में चले जाते हैं। सनातन धर्म में देव सो जाने की वजह से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।

एकादशी का महत्व
पद्म पुराण में बताया है कि जो भी भक्त हरिशयनी एकादशी के दिन सच्चे मन से उपवास रखता है और विधि-विधान से पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पापों का अंत होता है।

मृत्यु की प्राप्ति के बाद आत्मा को बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। उस आत्मा को जन्म-मरण से मुक्ति मिल जाती है। शास्त्रों के के अनुसार, देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ हो जाता है

और 16 संस्कारों पर चार महीने के लिए रुक जाते हैं। हालांकि पूजन, अनुष्ठान, मरम्मत करवाए घर में गृह प्रवेश, वाहन क्रय जैसे काम किए जा सकेंगे।

एकादशी का शुभ मुहूर्त

हरिशयनी एकादशी 11 जुलाई को रात 3:08 से 12 जुलाई रात 1:55 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल शाम साढ़े पांच से साढे सात बजे तक रहेगा। एकादशी के पूर्णमान तक पूजन जारी रहेगा।

व्रत का पारण = 13 जुलाई को सूर्योदय के बाद
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।

जीवन मंत्र डेस्क। शुक्रवार, 12 जुलाई को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं।

इस दिन से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु चार महीने तक पाताल में शयन करते हैं। देवउठनी एकादशी (शुक्रवार, 8 नवंबर) कार्तिक मास में आती है। आषाढ़ मास से कार्तिक मास तक ये चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं।

इस दौरान कोई मांगलिक कार्य भी नहीं किए जाते है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए देवउठनी एकादशी से जुड़ी खास बातें…
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार में दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि दान के रूप में मांगी थी।

भगवान ने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को ढंक लिया। अगले पग में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया। तीसरे पग में बलि ने अपने आप को समर्पित करते हुए सिर पर पग रखने को कहा। इस प्रकार के दान से प्रसन्न होकर भगवान ने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और कहा वर मांगो।

बलि ने वर मांगते हुए कहा कि भगवान आप मेरे महल में निवास करें। तब भगवान ने बलि की भक्ति को देखते हुए चार मास तक उसके महल में रहने का वरदान दिया। भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल में बलि के महल में निवास करते हैं।

एकादशी पर क्या करना चाहिए
देवशयनी एकादशी की सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में भगवान विष्णु की सोने, चांदी, तांबे या पीतल की मूर्ति स्थापित करें।

इसके बाद पूजा करें। विष्णुजी को पीतांबर (पीला कपड़ा) अर्पित करें। व्रत करने का संकल्प करें। आरती करें और अंत में अन्य भक्तों को प्रसाद वितरीत करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। अंत में चादर, गद्दे, तकिए, पलंग पर श्रीविष्णु को शयन कराएं।

सिंह : आपके पास ऊर्जा की बहुतायत होगी। लेकिन काम के दबाव में आप परेशान होने लगते है। आज बहुत ही लाभकारी दिन नहीं है। इसलिए अपनी धन की स्थिति की जांच करें। अच्छी बात यह है की लंबे समय से चल रहे कोर्ट केस में सफलता मिल सकती है।

परिवार और दोस्तों से सहायता मिलेगी। रिश्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखें। यह रिश्ता शादी का रूप ले सकता है। उत्सव आयोजन में प्रमुखता से शामिल होंगे। लाइफ स्टाइल सभी को प्रभावित करेगी। साहस पराक्रम बढ़ा हुआ रहेगा। जोखिम लेने में आगे रहेंगे।

तुला
आप सामने वाले को अपनी हंसी मजाक से प्रभावित करना चाह रहे हो लेकिन या तो वह आपसे प्रभावित नही होगा या फिर आप पर यह बात जाहिर नही होने देगा। इन राशि के जातकों का उनके पार्टनर से रिश्ता खराब हो सकता है। आपका विनम्र स्वभाव सराहा जाएगा।

अपनी नौकरी और कार्य क्षेत्र से काफी संतुष्ट है परन्तु क्रोध के कारण आप अपना आपा खो सकते है। अचानक धन लाभ की भी प्राप्ति हो सकती है। अपनी ख़ुशी में खोकर आपका ध्यान भविष्य के खतरों से हट सकता है।

कुंभ
करियर में अच्छे खासे बदलाव होने की संभावना है। सुख-सुविधा पर खर्चा करने का मन बन सकता है।

आपको पुरानी पैतृक संपत्ति जमीन-जायदाद या आभूषण के रूप में प्राप्त होगी। काम में आ रही अड़चनें दूर होंगी। सरकारी योजनाओं से धन का लाभ हो सकता है। इन लोगों को शनिदेव की कृपा से बहुत बड़ी कामयाबी मिलने वाली है।

निर्जला एकादशी साल 2019 (Nirjala Ekadashi 2019) में 13 जून 2019 गुरुवार को पूरे देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगी। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष (Jyeshtha Shukla Paksha) में पड़ने वाली एकादशी को ही निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) कहते हैं।

एकादशी में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा का विधान है। निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) रखने वाले को सभी एकादशियों का फल मिलता है। इसलिए इस एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

निर्जला एकादशी में जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की जाती । महाभारत काल (Mahabharat Kaal) के दौरान पांडू पुत्र भीम (Bhim) ने भी स्वर्ग की इच्छा से इस व्रत को रखा था ।

जिसकी वजह से निर्जला एकादशी के इस व्रत को भीमसेनी एकादशी (Bhimseni Ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप भी निर्जला एकादशी का व्रत करना चाहते हैं और आपको निर्जला एकादशी के बारे में नहीं पता तो आज हम आपको निर्जला एकादशी के बारे में बताएगं।

तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी के बारे में….. निर्जला एकादशी साल 2019 (Nirjala Ekadashi 2019) में 13 जून 2019 गुरुवार को पूरे देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगी।

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष (Jyeshtha Shukla Paksha) में पड़ने वाली एकादशी को ही निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) कहते हैं। एकादशी में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा का विधान है।

निर्जला एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) रखने वाले को सभी एकादशियों का फल मिलता है। इसलिए इस एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

निर्जला एकादशी में जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की जाती । महाभारत काल (Mahabharat Kaal) के दौरान पांडू पुत्र भीम (Bhim) ने भी स्वर्ग की इच्छा से इस व्रत को रखा था ।

जिसकी वजह से निर्जला एकादशी के इस व्रत को भीमसेनी एकादशी (Bhimseni Ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप भी निर्जला एकादशी का व्रत करना चाहते हैं और आपको निर्जला एकादशी के बारे में नहीं पता

तो आज हम आपको निर्जला एकादशी के बारे में बताएगं। तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी के बारे में….. हथेली में शुक्र पर्वत की यह स्थिति दिलाती है ऐशों आराम, आप भी जानें निर्जला एकदशी का महत्‍व (Nirjala Ekadashi Ka Mahatva) निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे बड़ा स्ठान दिया गया है ।

एकदशी में मुख्य रूप में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। प्रत्येक साल में 24 एकादशियां आती है। इन्हीं में से एक निर्जला एकादशी भी होती है। विष्णु पुराण के अनुसार एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है।

आप भी जानें पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पता । वह सिर्फ निर्जला एकादशी का ही व्रत कर ले तो उसे सभी एकादशियों का फल मिल जाएगा। साल की सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का पुण्य फल कई गुना है।

कई बार साल में मलमास या अधिमास होने के कारण 24 एकादशियों की जगह 26 एकादशियां भी पड़ जाती है। इसलिए माना जाता है कि जो व्यक्ति साल की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पता। अगर वह सिर्फ निर्जला एकादशी का ही व्रत कर ले तो उसे सभी एकादशियों का फल मिल जाता है।

निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस व्रत में पानी तक नहीं पिया जाता।

निर्जला एकादशी व्रत कथा (Nirjala Ekadashi Vrat Katha) निर्जला एकादशी से संबंधित पौराणिक कथा के कारण इसे पाण्डव एकादशी और भीमसेनी या भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

पाण्डवों में दूसरा भाई भीमसेन खाने-पीने का अत्यधिक शौकीन थे। अपनी भूख को नियन्त्रित करने में सक्षम नहीं थे इस कारण वह एकादशी व्रत को नही कर पाते थे। भीम के अलावा बाकि पाण्डव भाई और द्रौपदी साल की सभी एकादशी व्रतों को पूरी श्रद्धा भक्ति से किया करते थे।

भीमसेन अपनी इस लाचारी और कमजोरी को लेकर परेशान था। भीमसेन को लगता था कि वह एकादशी व्रत न करके भगवान विष्णु का अनादर कर रहा है। इस दुविधा से उभरने के लिए भीमसेन महर्षि व्यास के पास गया

तब महर्षि व्यास ने भीमसेन को साल में एक बार निर्जला एकादशी व्रत को करने कि सलाह दी और कहा कि निर्जला एकादशी साल की चौबीस एकादशियों के तुल्य है। जिसके बाद भीम ने निर्जला एकादशी का पूरे विधि-विधान से व्रत किया।

इसी पौराणिक कथा के बाद निर्जला एकादशी भीमसेनी एकादशी और पाण्डव एकादशी के नाम से प्रसिद्ध हो गयी। इस एकादशी को सभी एकादशीयों में विशिष्ट स्थान प्राप्त है । इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को अपने जीवन के सभी पापों से छुटकारा मिलता है।

निर्जला एकादशी से पहले ये 6 राशि वाले कभी भी बन सकते है करोड़पति :

मेष राशि: आप राशि वाले जातकों को बहुत अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है आपको अपने ऊपर संयम बरतने की आवश्यकता है तथा मन में नकारात्मक चिंताएं एवं विचार आ सकते हैं

इसीलिए आपको काफी हिम्मत बरतने की आवश्यकता है किंतु चंद्र का गोचर आपको अनुकूलता प्रदान करेगा जिससे आप अपने शत्रुओं से बचकर रहेंगे प्रेम जीवन में साथी की तरफ से थोड़ी निंदा प्राप्त हो सकती है किंतु आप अपनी हिम्मत को ना हारे।

मिथुन राशि: व्यापार से संबंधित रखने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छा समय है यदि कोई नया योजना के तहत कार्य करना चाहते हैं तो आपके लिए समय बहुत अच्छा है

कहीं ऐसे अचानक ही अप्रत्याशित श्रोता के सामने आ जाएंगे जिसका लाभ आपको पूरी तरह से उठाना है और अपने जीवन को पूरी तरह से बदलना है भगवान शंकर जी की कृपा आपके ऊपर बनी हुई है।

सिंह राशि: प्रेम जीवन आपके लिए बहुत अच्छा समय है यदि आप किसी व्यक्ति से अत्यधिक प्रेम करते हैं और अपने प्रेम का प्रस्ताव उसके सामने रखना चाहते हैं तो यह समय आपके अनुकूल है

आप अपने साथी को अपनेपन का एहसास अवश्य कराएं किसी भी प्रकार की गलतफहमी अपने मन में ना पालें व्यापार हेतु भी आपके लिए बहुत अच्छा समय है धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं।

तुला राशि: इस राशि के जातकों के व्यापार में पहले से मुताबिक काफी सुधार होने वाला है और इनको अपने कार्य में कोई बड़ी सफलता प्राप्त हो सकती है लोगों के पास रुका हुआ

धन इनको प्राप्त होने की संभावना बढ़ रहे हैं तथा नए नए व्यवसाय प्राप्त होने के भी योग बन रहे हैं यह लोग कहीं लंबी यात्रा का प्रोग्राम बना सकते हैं जो इनके लिए काफी अच्छा साबित होगा।

मकर राशि: आप लोगों की मुलाकात अचानक किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हो सकती है जिससे मिलने के बाद आपका पूरा दिन बदल सकता है यदि आप कोई नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं

और किसी व्यक्ति को अपना सा दीदार बनाना चाहते हैं तो ऐसा करने से पहले कानूनी कार्यवाही तथा हर तरह के दस्तावेजों को पूरी तरह से जांच लें और गठबंधन बना ले क्योंकि यही करना आपके भविष्य के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगा और आपको अच्छा फल की प्राप्ति देगा।

मीन राशि: इस राशि के लोगों की यदि बात करी जाए तो इनके कुंडली में प्रेम योग बन रहा है जिसमें यह अपने प्रेमी से विवाह कर सकते हैं क्योंकि भगवान शंकर जी की कृपा से आपके योग में सकारात्मक संकेत प्राप्त होते हुए दिख रहे हैं

एवं भाग्य आपका पूरी तरह से साथ देगा किंतु किसी भी प्रकार की जल्दबाजी ना करें आप अपने प्रेम प्रस्ताव को शादी के रूप में परिजनों के आगे रख सकते हैं थोड़ा संयम रखें सफलता आपके हाथ में होगी।