200 साल बाद जन्माष्टमी पर बन रहा है दुर्लभ योग ,भूल से भी ना करें उस दिन ये 5 काम

श्री कृष्ण जन्माष्टमी, को भारत में नहीं बल्कि कई विदेशों में भी बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अर्धरात्रि यानी ठीक 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था जो भगवान विष्णु का ही अवतार थे।

नारायण के इस अवतार का मुख्य उद्देश्य मुथरा के राजा कंस के बढ़ते अत्याचार को समाप्त करके उसका विनाश करना था। जिसके लिए उन्होंने कंस की बहन देवकी की कोख से जन्म लिया। बहुत से भक्त इस दिन व्रत-उपवास भी रखते है, जिसमे अर्ध रात्रि तक यानी 12 बजे कृष्ण जन्म तक उपवास रखना होता है।

कान्हा के जन्मोत्सव त्योहार जन्माष्टमी पर इस साल बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस साल दो दिन पड़ने जा रही कृष्ण जन्माष्टमी कई लोगों के लिए काफी खास है|इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बन रहा है, जैसा उस वक्त बना था जब द्वापर युग में कान्हा धरती पर जन्मे थे। इस संयोग को श्रीकृष्ण जयंती योग के नाम से जाना जाता है। कई साल बाद इस बार फिर से वैसा ही योग बन रहा है|

रविवार 2 सितंबर रात 8 बजकर 48 मिनट पर अष्टमी तिथि लग रही है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो इसी के साथ सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण जयंती योग बनता है. इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले बहुत ही भाग्यशाली माने जाते हैं.

जन्माष्टमी 2 सितंबर को त्रिपुष्कर योग बना हुआ है। इस योग में जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका तीन गुणा लाभ मिलता है। वहीँ अगर आप इस योग में कोई ऐसा काम करते है जो शास्त्रों में वर्जित है तो इसके वजह से आपको तीन गुना पाप भी भोगना पड़ता है |इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे कामो के बारे में बताने वाले है जिसे आपको जन्माष्टमी के दिन भूल से भी नहीं करना चाहिए |तो आइये जानते है कौन कौन से है वो कार्य

1.जन्माष्टमी के दिन यदि आप अपने से कमजोर व्यक्ति को दुःख पहुंचाते है या फिर अपने फायदे के लिए किसी को नुक्सान पहुंचाते है तो इस काम के लिए आपको तीन गुणा पाप भोगना पड़ेगा और जन्माष्टमी के दिन आप ऐसा कोई भी काम ना करें |जन्माष्टमी को सिद्धि की रात भी कहते हैं इसलिए इस दिन अध्यात्म पर ध्यान देना चाहिए और वाद-विवाद एवं कलह से दूर रहना चाहिए। जन्माष्टमी के व्रत को व्रतराज भी कहा गया है। इस दिन घर में शांति और सद्भाव बनाए रखने से लक्ष्मी माता प्रसन्न रहती हैं।

2.जन्माष्टमी के दिन आप कान्हा जी की नयी मूर्तियों की पूजा करते है लेकिन घर में जो कान्हा जी की पुरानी मूर्तियाँ होती है उसे आप जल में प्रवाहित कर देते है लेकिन आपको बता दे ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए बल्कि आपको जन्माष्टमी के दिन घर में रखी कान्हा जी की पुरानी मूर्तियों की भी पूजा करें और उन्हें भी माखन मिसरी का भोग लगाएं।

3.शास्त्रों में बताया गया है कि जन्माष्टमी, शिवरात्रि, नवरात्र के दिनों में संयम का पालन करना चाहिए और भूल से भी इन दिनों यौन संबंध और काम भाव पर नियंत्रण रखना चाहिए इससे व्रत सफल होता है और पूजा का कई गुणा फल मिलता है |

4.जन्माष्टमी का त्योहार साल में एकबार आता है और इस बार तो विशेष संयोग बना हुआ है। ऐसे में इस दिन आपको देर तक नहीं सोना चाहिए बल्कि जन्माष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान ध्यान करें और श्रीकृष्ण की पूजा करें।

5. जन्माष्टमी के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो भी मांस-मदिरा के सेवन से परहेज रखकर पुण्य हासिल कर सकते हैं। इस दिन आपको केवल पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए।

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