सावन के इस पावन महीने में इन सब्जियों का सेवन माना गया है अशुभ ,भूल से भी ना करें इनका सेवन

श्रावण मास कहो या सावन का महीना कोई भी शब्‍द कानों में पड़ते ही शीतलता स्‍वत: ही प्राप्‍त हो जाती है। ज्‍येष्‍ठ और आषाढ़ की भीषण गर्मी और तपिश से मुक्ति दिलाने हेतु श्रावण मास का आगमन होता है। श्रावण मास की प्रतीक्षा मनुष्‍य, पशु-प‍क्षी व प्रकृति ही नहीं करते अपितु देव और किन्‍नरों को भी इसका इंतजार रहता है।

हिन्दी पंचांग के सभी बारह महीनों में श्रावण मास का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि ये शिवजी की भक्ति का महीना है। श्रावण मास को सावन माह भी कहते है। मान्यता है कि जो लोग इस माह में शिवजी की पूजा करते हैं, उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं।

कार्यों में आ रही मुश्किलें खत्म हो जाती हैं और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। इसी वजह से देशभर के सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहेगी। इस महीने में पूजा करने वालों पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। शास्त्रों में भी भगवान को प्रसन्न करने के लिए सात्विक भोजन करने की सलाह दी गई है।

ये भक्ति का महीना है, इस कारण इन दिनों के लिए शास्त्रों में कुछ ऐसे काम बताए गए हैं जो हमें नहीं करना चाहिए। जैसा की हम जानते है की इस महीने में बहुत से लोग मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन बंद कर देते हैं। लेकिन इन सब चीजों के अतिरिक्त कुछ और भी चीजें हैं जिन्हें सावन में खाना पाप माना जाता है।

सावन में हरी पत्तेदार सब्जी (साग) खाना है वर्जित

धार्मिक दृष्टि के साथ साथ स्वास्थ की दृष्टि से भी सावन में कुछ चीजों को खाना वर्जित बताया गया है। जिसमे से पहला जो नाम है वो है हरी पत्तेदार सब्जियां |वैसे आमतौर पर तो साग को सेहत के लिए गुणकारी माना गया है। लेकिन सावन के महीने में साग में वात बढ़ाने वाले तत्व की मात्रा बढ़ जाती है। इसीलिए यह इतना गुणकारी नहीं रह जाता जितना और महीनो में रहता है और यही कारण है कि सावन में साग खाना वर्जित माना गया है।

इसके साथ ही सावन के महीने में साग ना खाने का एक दूसरा कारण यह भी है की इन दिनों कीट पतंगों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है और साग के साथ घास-फूस भी उग आते हैं जो की हमारे सेहत के लिए हानिकाक होते हैं। इसलिए सावन में साग खाने की मनाही की गई।

सावन में बैंगन खाना भी वर्जित माना गया है

वही सावन के महीने में साग के बाद बैंगन भी एक ऐसी सब्जी है जिसे खाना वर्जित माना गया है । इसका धार्मिक कारण यह है कि बैंगन को शास्त्रों में अशुद्घ कहा गया है। यही वजह है कि कार्तिक महीने में भी कार्तिक मास का व्रत रखने वाले व्यक्ति बैंगन नहीं खाते हैं। वैज्ञानिक कारण यह है कि सावन में बैंगन में कीड़े अधिक लगते हैं जो की स्वास्थ्य पर बुरा डालता है इसलिए सावन में बैंगन खाने की मनाही है।

दूध का सेवन न करें

शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में दूध का सेवन भी वर्जित माना गया है|यही बात बताने के लिए सावन में शिव जी का दूध से अभिषेक करने की परंपरा शुरू हुई। वही यदि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाये तो इन दिनों दूध पित्त बढ़ाने का काम करता है। अगर दूध का सेवन करना हो तो खूब उबालकर प्रयोग में लाएं। कच्चा दूध प्रयोग में नहीं लाएं। सावन में दूध से दही बनाकर सेवन कर सकते हैं

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